Friday, February 18, 2011

हवा





कैसे मालूम हो कि हवा हवा है 
आज वो चल रही बेसदा बेनवा है 

सांस चल रही है हवा ही होगी 
पत्ता भी अभी ही पेड़ से हुआ जुदा है

अहसास तो होते ही हैं बेचेहरा 
दिल को पता है कि मायूस फिजा है  

हवाओं का भी जरुर होता है तन 
जिस्म है सर्द किसी ने तो छुआ है 

सराब पे लिखा था नाम मिट गया 
नज़रों की फिर इसमें क्या खता है 

बुझते अलाव सुलग उठे फिर से 
मुझे यकीन आ गया जरुर हवा है 


18 comments:

  1. bujhte alaaw sulag uthe... haan ye hawa hi to hai... bahut ho achhi rachna

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  2. साँस चल रही..... बहुत सुंदर पंक्तियाँ रची हैं ......

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  3. हवाओं का भी जरुर होता है तन
    जिस्म है सर्द किसी ने तो छुआ है

    बहुत खूबसूरत गज़ल ...

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  4. आपने बड़े ख़ूबसूरत ख़यालों से सजा कर एक निहायत उम्दा ग़ज़ल लिखी है।

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  5. man mein uthtee bhawnaon kee hawa ko sundar shabdon mein piroya hai aapne..
    haardik shubhkamnayne

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  6. अहसास तो होते ही हैं बेचेहरा
    ....
    हवाओं का भी जरुर होता है तन

    वाह वाह

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  7. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 22- 02- 2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    http://charchamanch.uchcharan.com/

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  8. बहुत ही खुबसुरत प्रस्तुति......

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  9. नमस्कार !
    हवाओं का भी जरुर होता है तन
    जिस्म है सर्द किसी ने तो छुआ है

    बहुत खूबसूरत गज़ल !

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  10. सांस चल रही है....बहुत उम्दा शेर...बहुत ख़ूबसूरत गज़ल.

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  11. शायद आपके व्लाग पर पहली बार आया हूँ | लगता है बहुत देर हुई आने में साँस चल रही है हवा ही होगी ....... ,खुबसूरत अहसास को खुबसूरत अल्फ़ाज देना तारीफ़ के क़ाबिल है |शुभकामनायें ..,

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  12. pahli baar aapke blog par aay ahoon aur bahut hi behatreen gazal .. badhayi sweekar kare. kuch sher seedhe dil me utar gaye ji
    ----------
    मेरी नयी कविता " तेरा नाम " पर आप का स्वागत है .
    आपसे निवेदन है की इस अवश्य पढ़िए और अपने कमेन्ट से इसे अनुग्रहित करे.
    """" इस कविता का लिंक है ::::
    http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/02/blog-post.html
    विजय

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  13. आदरणीया मीनू भगिया जी
    सादर सस्नेहाभिवादन !

    मैं आपकी पोस्ट पर कमेंट करके गया था … पता नहीं क्यों छपा नहीं …
    बहुत शानदार है आपकी ग़ज़ल …

    अहसास तो होते ही हैं बेचेहरा
    दिल को पता है कि मायूस फिजा है


    बहुत प्यारा शे'र है …

    बुझते अलाव सुलग उठे फिर से
    मुझे यकीन आ गया जरुर हवा है

    आऽऽह … क्या एहसास का शे'र है ! बहुत ख़ूब !

    मुबारकबाद कबूल फ़रमाएं …

    ♥ महाशिवरात्रि की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं ! ♥
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  14. Minoo Ji
    bujhte alaav phir sulag uthe phir se ...badiya hai
    Surinder ratti
    Mumbai

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  15. सुंदर प्रस्तुति बधाई और शुभकामनाएं |

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