Wednesday, March 21, 2012

आंसू









जज्बा गर दिल में दबाया होता
आंसू कोई यूँ तो न जाया होता

जरा सी तपिश से पिघल गया
रिश्ता मोम का न बनाया होता

दर्द तो धीरे धीरे पिघल ही जाता
कोई अलाव तो न सुलगाया होता

हम तो चल पड़ते तेरा हाथ पकड़
इक बार मुड़ कर तो बुलाया होता

आंसुओं की कीमत पहचानी होती
तेरे घर खुशियों का सरमाया होता

Monday, March 12, 2012

इल्जाम
















खता किसी की इल्जाम हमारे सर पर
पता किसी का तूफ़ान हमारे घर पर

मुद्दतें गुजरीं सोचते खतावार है कौन
सुना इन्साफ भी होगा तुम्हारे दर पर

मिले कभी तो पूछेंगे हासिलातों को
अभी चलते हैं अपने अपने सफर पर

हर घर की सेहन की किस्मत है अलग
कहीं सर्द हवा है कहीं धूप शज़र पर

परिंदा उडेगा ही आख़िर फडफडा कर
क्यूँ आसमां लिख दिया उसके पर पर

दूर तक फैला शहर सिमट आया है
क्यूँ न करे गुरुर रास्तों ओ हुनर पर

हयात ए दश्त भी पार कर ही लेंगे
काबू बनाये रखा अगर अपने डर पर