Saturday, August 6, 2011

साये










अक्सर इंसानों को घेर लेते हैं साए 
कभी खुशनुमा कभी उदास होते हैं साये 

अज़ल से चले आये हैं साथ साथ 
साथ ज़िन्दगी के छूट जाते हैं साए 

पिन्हा होते हैं जिस्म के लहू में 
बन आरजुएं उभर आते हैं साए 

रौशनी के साथ तो चलती है दुनियां 
अंधेरों में साथ बस देते हैं साए 

बन कर दिन और रात मिला करते हैं 
ज़मीन आसमान के भी होते हैं साए 

6 comments:

  1. बहुत खूब..... बेहतरीन शेर हैं..

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  2. बन कर दिन और रत मिला करते है
    जमीन और आसमान के भी होते है साये .
    सुन्दर अभिव्यक्ति .
    मित्रता दिवस की शुभकामनाये.

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  3. meenu di
    bahut hi badhiya gazal likhi hai aapne
    bilkul hi sach ko bayan kiya hai aapne to .
    kamal haiekyatharth chitran ke liye bahut bahut badhai
    poonam

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  4. happy friendship day to all of you , great to have friends like you , god bless you all

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