Thursday, December 9, 2010

चेहरा









हरे पत्तों और दरख्तों में गुम हुआ चेहरा
था सब्ज़ अहसास वर्ना कहाँ गया चेहरा

जिस्म में उतर आया था वो धीरे धीरे
वो तो इक महताब था मैंने समझा चेहरा

यादों का दरीचा बंद हो गया दरमियाँ
नक्श में उतर आया आधा अधूरा चेहरा

कशकोल जैसा दिखता है कभी रोटी जैसा
देखा है हमने चाँद में मुफलिसी तेरा चेहरा

अनजान रास्तों मोड़ों पर ठिठके से हम खड़े
नए शहर में ढूंढते हैं जाना पहचाना चेहरा

बसते बसते वक़्त लगेगा आदमी हैं हम
नए घर में तलाशते हैं खुद अपना चेहरा

पत्ते वही गुल वही गुंचे वही शबनम वही
दरख्तों जैसा नहीं होता इंसानों का चेहरा

12 comments:

  1. बहुत खूब ...अच्छी गज़ल


    कृपया वर्ड वेरिफिकेशन हटा लें ...टिप्पणीकर्ता को सरलता होगी ...

    वर्ड वेरिफिकेशन हटाने के लिए
    डैशबोर्ड > सेटिंग्स > कमेंट्स > वर्ड वेरिफिकेशन को नो करें ..सेव करें ..बस हो गया .

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  2. sangeeta ji , arun ji...shukriya


    sangeeta ji hata liya ' word verfication '
    ... thx for telling me , i didn't know about this.

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  3. मीनू जी ,
    आपने ब्लॉग पर अपना प्रोफाईल नहीं लगाया हुआ है ...मुझे आपके कमेन्ट से आपके प्रोफाईल को देखना पड़ा ...आप बहुत खूबसूरत गज़ल लिखती हैं ...
    आपने लिखा है की आपने मुझे knol पर पढ़ा है ...पर मैं knol से वाकिफ नहीं हूँ ..
    वक्त मिले तो आप मेरा दूसरा ब्लॉग भी देखें ..

    http://geet7553.blogspot.com/

    आभार ..

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  4. wo sangeeta puri hain , sorry sangeeta ji
    ye profile kaise lagate hain , ek par to hai , main computers ke baare mein zyada janakri nahin rakhti bas kaam chala leti hun , aapne bataya ' word verfication ' ke baare mein , ab ye bhi dekhti hun kaise hoga , bahut bahut dhanyavad aur aapka doosra blog bhi dekhti hun :)

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  5. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी रचना कल मंगलवार 14 -12 -2010
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..


    http://charchamanch.uchcharan.com/

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  6. सुन्दर अभिव्यक्ति

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  7. waah ... apni ye rachna aur iske nichewali rachna rasprabha@gmail.com par parichay,tasweer, blog link ke saath bhejiye vatvriksh ke liye

    http://urvija.parikalpnaa.com/

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  8. अहसासों से परिपूर्ण सुन्दर गज़ल..कुछ शेर तो लाज़वाब हैं..बधाई

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